नरसिंहपुर- न्यायालय सत्र न्यायाधीश अखिलेश शुक्ला द्वारा शासन बनाम विनोद ठाकुर मामले में फैसला सुनाते हुये अभियुक्त विनोद पिता रामदयाल ठाकुर निवासी रेवानगर थाना करेली को हत्या का दोषी पाते हुये आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया।

ये है मामला

संक्षेप मे मामला इस प्रकार है कि अभियुक्त विनोद 14.03.2025 को अपने बडे भाई रमेश की गंगाजली मे मोटर साईकिल से सीहोरा गया था। लौटते समय अपने भाई ओमप्रकाश को साथ लेकर पहले बरहटा गया, जहां शराब के नशे में दोनो के बीच झगडा हुआ, फिर बरहटा से रेवानगर लौटते समय रास्ते मे हीरालाल नौरिया के खेत में दोनो ने शराब का सेवन किया।

 वहीं जमीन को लेकर आपस मे विवाद होने पर अभियुक्त विनोद ने ओमप्रकाश की गरदन में कुल्हाडी मारकर उसकी हत्या कर दी। मामले में पुलिस थाना करेली द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर अभियोग पत्र न्यायालय मे प्रस्तुत किया था यद्धपि मामले मे कोई चक्षुदर्शी साक्षी नही था, परन्तु न्यायालय मे संपूर्ण मौखिक दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को हत्या का दोषी पाते हुये आजीवन कारावास के दण्ड से दण्डित किया है। अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक धर्मेन्द्र ममार ने पैरवी की है।

यह भी है फैसले में 

न्यायालय ने अपने फैसले में पुलिस की कार्य प्रणाली पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुये लेख किया है कि चिन्हित तथा संवेदनशील प्रकरणों को छोडकर अन्य प्रकरणो मे पुलिस की विवेचना अत्यंत सतही तथा लापरवाही पूर्ण होती है ऐसे प्रकरणो मे पुलिस द्वारा मात्र पारंपरिक तरीके से मौका नक्शा जप्ती साक्षियों के कथन आदि औपचारिक कार्यवाही कर अभियोग पत्र प्रस्तुत कर खानापूर्ति कर दी जाती है। महत्वपूर्ण तथा अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य को संग्रहित करने का गंभीर प्रयास नही किया जाता जो अत्यंत आपत्ति जनक है। न्यायालय ने आगे यह भी निर्धारित किया है कि यद्धपि पुलिस द्वारा विवेचना की कार्यवाही उपेक्षा एवं लापरवाहीपूर्वक कर त्रुटिया की गई है, परन्तु यह सुस्थापित विधि है कि विवेचना की त्रुटियों का लाभ अभियुक्त को प्रदान नही किया जा सकता मामले मे