नरसिंहपुर- न्यायालय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आलोक मिश्रा ने सत्र प्रकरण क. 232/25 शासन बनाम दुर्गेश पर्ते में निर्णय पारित कर आरोपी को हत्या का दोषी पाते हुये आजीवन कारावास के दंड से दंडित किया है।

ये था मामला

 संक्षेप में मामला इस प्रकार है कि दि. 07.08.2025 को संतोष गौंड निवासी ग्राम जेरा दोपहर करीब 03 बजे गाय-भैंस चराने बाघचेतरा जंगल गया था। रात लगभग 09 बजे गाय-भैंस वापस आ गये परंतु संतोष घर नहीं लौटा। सब कहीं घमने पर जब संतोष का पता नही चला तब दूसरे दिन संतोष की पत्नी त्रिवेणी ने थाना मुंगवानी में रिपोर्ट दर्ज की जिस पर गुमशुदा व्यक्ति पंजीयन कर जांच में लिया गया। जांच के दौरान दि. 08.09.2025 को ही साक्षी अमर सिंह ने अपने बयान में बताया कि उसने घटना दिनांक की शाम को लगभग 5 बजे रेणाखुदरा जंगल में मृतक संतोष व अभियुक्त दुर्गेश के बीच विवाद होते हुये देखा था। उसी समय अभियुक्त ने संतोष को कुल्हाड़ी से मार डाला। 

कुछ दिनों बाद मिले थे तथ्य

उक्त बयानों के आधार पर जब पुलिस घटना स्थल पर गई तो वहां संतोष की न तो लाश मिली और न ही हत्या से संबंधित कोई साक्ष्य मिला। बाद में 22.09.2025 को बाघचेतरा नाला के पास पुलिस को एक फुल शर्ट, एक अंडरवियर तथा उसके आसपास 17 स्थानों पर मानव ह‌ड्डियां मिली थी।

संदेह से परे माना मामला

 डीएनए. रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि उक्त हड्डियों मृतक संतोष गौंड की ही थी। मामले में पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने तथा साक्षियों के कथन लेने में विलंब के संबंध में न्यायालय द्वारा निर्धारित किया गया है कि उक्त विलंब विवेचना का दोष है, जिसका लाभ अभियुक्त को नही दिया जा सकता। मामले में प्रस्तुत साक्षी अमर सिंह की साक्ष्य तथा जप्तशुदा शर्ट पर पायें गये कट के निशान से स्पष्ट है कि मृतक संतोष पर किसी धारदार वस्तु से प्रहार किये गये थे और उसकी मृत्यु आपराधिक मानववध प्रकृति की थी तथा मामले को संदेह से परे प्रमाणित मानते हुये अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। मामले में अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक धर्मेन्द्र ममार ने पैरवी की है।